हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के एक सदस्य ने सऊदी अरब को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यमन की नाकेबंदी जारी रही और शांति प्रक्रिया से जुड़े वादों को लागू नहीं किया गया, तो रियाज के हित गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।
अंसारुल्लाह के राजनीतिक कार्यालय के सदस्य मोहम्मद अल-फ़रह ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि सऊदी समर्थक समूहों के लगातार जारी होने वाले बयान वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते। उनके अनुसार, युद्ध और शांति का निर्णय इन समूहों के हाथ में नहीं है, बल्कि वे पूरी तरह सऊदी अरब पर निर्भर हैं और केवल उसके आधिकारिक रुख को दोहराते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यमन की संप्रभुता का सबसे बड़ा उल्लंघन सऊदी अरब के हवाई हमलों से हुआ है, न कि उन बीमारों और घायलों की वापसी से, जो वर्षों बाद अपने देश लौटे हैं।
अल-फ़रह ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई से लेकर अपने समर्थक गुटों को आर्थिक सहायता देने तक, यमन के आंतरिक मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रियाद यमन को विभाजित और कमजोर करना चाहता है तथा मौजूदा स्थिति को बनाए रखकर राजनीतिक समाधान के रास्ते में बाधा डाल रहा है।
ग़ाज़ा के समर्थन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता के प्रति यमन के समर्थन को यमन के लोगों पर आर्थिक दबाव डालने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपने बयान के अंत में अल-फ़रह ने कहा कि ग़ाज़ा के समर्थन का निर्णय यमन के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है, और सऊदी अरब अपने समर्थक समूहों के माध्यम से भी इस नीति को नहीं रोक पाएगा।
आपकी टिप्पणी